बिहार की संस्कृति


संस्कृति

बिहार की संस्कृति बहु्आयामी है। लोक गीत, लोक संगीत, तीज-त्योहार, मेले आदि हमारी विविधतापूर्ण संस्कृति का हिस्सा हैं। बिहार ने अपने प्राचीन इतिहास और संस्कृति को बनाए रखा है। यहाँ विभिन्न अवसरों और समारोहों में लोक संगीत गाया जाता है।

बिहार के त्योहार

बिहार में विभिन्न त्योहार मनाए जातें है। जैसे कि छठ, तीज, चित्रगुप्त पूजा, मकर संक्रान्ति, सरस्वाती पूजा, होली, ईद-उल-फित्र, राम नवमी, शिवरात्री, बुद्ध पूर्णिमा, महावीर-जयंती, क्रिसमस।

(छठ पर्व)

छठ में सूर्य भगवान की पूजा की जाती हैं।


(तीज)

तीज ये व्रत महिलाए अपने पति के लिए रखती हैं।


( मकर संक्रान्ति)



मकर संक्रान्ति के दिन लोग पारंपरिक रुप से चुड़ा-दही और तिल खाते हैं।







चित्रगुप्त पूजा

ये पूजा ये पूजा कायस्थ लोग करतें है। इस पूजा के दिन वे कलम का इस्तेमाल नही करते।




बुद्ध पूर्णिमा भगवान बुद्ध के जन्म और महापरिनिर्वाण की याद में ये पर्व मनाया जाता है।








(जल मंदिर , पावापुरी)


महावीर जयंती जैन धर्म के 24वें तीर्थकंर महावीर के जन्म दिन मनायी जाती है।






राम नवमीमर्यादापुरूषोत्तम राम के जन्म दिन पर ये त्योहार मनाया जाता है।






( ईद-उल-फित्र) रमज़ान का महीना खत्म होने पर ईद मनाई जाती है । इस दिन लोग खासतौर से सेवई खाते हैं।









बिहार के मेले

बिहार में सोनपुर, कुशिया, पितृपक्ष जैसे प्रसिद्ध मेले लगते हैं।




(सोनपुर मेला)

सोनपुर मेला एशिया का सबसे बड़ा पशु मेला है। एक महीने चलने वाला यह मेला कार्तिक पूर्णिमा से शुरु होता है।























पितृपक्ष मेला

सितंबर माह में पूरे देश से हिन्दू गया आकर पुरखों को पिंडदान करते हैं । कहते हैं कि पिंडदान करने से गुज़रे हुए लोगों को मोक्ष मिलता है।

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